खुशखबरी! ये कपड़े अब बचाएंगे 'इबोला' जैसे इंफेक्शंस से!
अक्सर देखा गया है कि घर से बाहर जाने के दौरान कई तरह की इंफेक्शन डिजीज हो जाती हैं. लेकिन आप इमेजिन कीजिए कि आपके लिए ऐसे कपड़े बन जाएं जिससे आपको ये डिजीज ना हो तो कैसा लगेगा. जी हां, अब ये बात सच होने जा रही है.
क्यों बनाई गई ऐसी ड्रेस-
शोधकर्ता ऐसे कपड़ों पर काम कर रहे हैं जो आपको ना सिर्फ सैनिटाइज रखेंगे बल्कि इससे जर्म्स और इंफेक्शन डिजीज से भी आप आसानी से बच पाएंगे. इन फैलने वाली इंफेक्शन डिजीज में इबोला जैसे इंफेक्शन भी शामिल है.
शोधकर्ता ऐसे कपड़ों पर काम कर रहे हैं जो आपको ना सिर्फ सैनिटाइज रखेंगे बल्कि इससे जर्म्स और इंफेक्शन डिजीज से भी आप आसानी से बच पाएंगे. इन फैलने वाली इंफेक्शन डिजीज में इबोला जैसे इंफेक्शन भी शामिल है.
शोधकर्ताओं ने वेस्ट अफ्रीका में 2014 में फैले इबोला इंफेक्शन को देखते हुए एक ऐसी ड्रेस डवलप की है जो पेपर बेस्ड सैनिटाइज्ड है. इस टेक्नोलॉजी की अच्छी बात ये है कि ये बहुत सस्ती है.
कैसे बना है ये कपड़ा-
ये ड्रेस एलुमिनियम और हेक्सागन यानि हनीकॉम्ब पैटर्न की मोटी लेयर्स से बनी है जो कि प्लाज्मा को इलेक्ट्रोड्स और आयोनाइज्ड गैस सर्व करेगी.
ये ड्रेस एलुमिनियम और हेक्सागन यानि हनीकॉम्ब पैटर्न की मोटी लेयर्स से बनी है जो कि प्लाज्मा को इलेक्ट्रोड्स और आयोनाइज्ड गैस सर्व करेगी.
क्या कहते हैं शोधकर्ता-
यूएस की रटगर्स यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर आरोन मैजियो ने पेपर के इस्तेमाल के बारे में बताया है कि पेपर एक बहुत पुराना मैटिरियल है लेकिन इसके अपने यूनिक गुण है. इसी कारण से इस पर हाई टेक एप्लीकेशंस के एक्सपेरिमेंट करना आसान है.
यूएस की रटगर्स यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर आरोन मैजियो ने पेपर के इस्तेमाल के बारे में बताया है कि पेपर एक बहुत पुराना मैटिरियल है लेकिन इसके अपने यूनिक गुण है. इसी कारण से इस पर हाई टेक एप्लीकेशंस के एक्सपेरिमेंट करना आसान है.
प्रोफेसर आरोन कहते हैं कि हमने हाई वॉल्टेज मेटालाइज्ड पेपर की खादी शीट्स पर हाई वोल्टेज एप्लाई कि और पाया कि इससे प्लाज्मा जनरेट हो रहा है, जो कि हीट, अल्ट्रा्वॉयलेट रेडिएशन और ओजोन का कॉम्बीनेशन है जिससे इंफेक्टिड बैक्टीरिया को मारा जा सकता है.
पेपर में मौजूद फाइबर्स और पोरस के गुणों के कारण पेपर गैस सोख लेता है, प्लाज्मा को फ्यूल देता है और ठंडा करता है.
प्रोसिडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में पब्लिश इस स्टडी के मुख्य शोधकर्ता जिंगजिन शी का कहना है कि हमारी जानकारी के मुताबिक, हम पहले ऐसे हैं जो पेपर बेस्ड प्लाज्मा जनरेट कर रहे हैं.
99% तक बैक्टीरिया को मार रही है ये टेक्नोलॉजी-
स्टडी में एक्सपेरिमेंट के दौरान पाया गया कि पेपर बेस्ड सैनिटाइजर्स से 99% से ज्यादा यीस्ट स्पीशीज़ को मार दिया गया और 99.9% से अधिक ई कोलाई बैक्टीरिया सेल्स मार दिए गए. अधिकत्तर ई कोलाई बैक्टीरिया हार्मलेस होते हैं और ये हेल्दी ह्यूमन इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट का अहम हिस्सा होते हैं. हालांकि कई सेल्स डायरिया, यूरिनरी ट्रैक्ह इंफेक्शन, निमोनिया और बाकी बीमारियों के लिए जिम्मेदार होते हैं.
स्टडी में एक्सपेरिमेंट के दौरान पाया गया कि पेपर बेस्ड सैनिटाइजर्स से 99% से ज्यादा यीस्ट स्पीशीज़ को मार दिया गया और 99.9% से अधिक ई कोलाई बैक्टीरिया सेल्स मार दिए गए. अधिकत्तर ई कोलाई बैक्टीरिया हार्मलेस होते हैं और ये हेल्दी ह्यूमन इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट का अहम हिस्सा होते हैं. हालांकि कई सेल्स डायरिया, यूरिनरी ट्रैक्ह इंफेक्शन, निमोनिया और बाकी बीमारियों के लिए जिम्मेदार होते हैं.
फ्यूचर में चोट को भी ठीक करेंगे ये सैनिटाइज्ड कपड़े-
शोधकर्ताओं के मुताबिक, शुरूआती नतीजों में पाया गया कि सैनिटाइजर्स बैक्टीरिया के स्पोर को मारते हैं जिन्हें पुराने तरीकों से मारना बहुत मुश्किल है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक, शुरूआती नतीजों में पाया गया कि सैनिटाइजर्स बैक्टीरिया के स्पोर को मारते हैं जिन्हें पुराने तरीकों से मारना बहुत मुश्किल है.
ऐसा माना जा रहा है कि भविष्य में पेपर बेस्ड सैनिटाइजर्स शायद डिवाइस के लिए भी सूटेबल होंगे जो कि लैबोरेट्री एक्यूपमेंट्स को सैनिटाइज करने की क्षमता रखेंगे. इसके अलावा घावों को जल्दी ठीक करने के लिए स्मार्ट बैंडेज और अन्य कई तरीकों से भी इस्तेमाल हो सकेंगे.
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